सेवा ही परोपकार है

श्रद्धेय स्वामी सत्यमित्रानंद जी के आशीर्वाद से १९९८ से समाज सेवा, संस्कृति और आध्यात्म की एक अनवरत यात्रा।

अष्टादस पुराणेसु व्यासस्य वचनम द्वयम।‌ परोपकाराय पुण्याय पापाय परपाडे नम।‌।

महर्षि व्यास ने अठारह पुराणों की रचना का सार सिर्फ दो शब्दों में व्यक्त किया परोपकार पुण्य और परपीड़ा पाप अहंकार रहित होकर, निर्मल निश्चल भाव से, निःस्वार्थ, वसुधैव कुटुम्बकम्‌ को ध्यान में रखते हुए मानवमात्र की सेवा ही परोपकार है।

इन्हीं उदात्त भावनाओं से प्रेरित होकर वर्ष १९९८ में श्रद्धेय स्वामी सत्यमित्रानंदजी के शुभाशीष से परोपकार का जन्म हुआ जो आज अपनी सेवा यात्रा के १२ वर्ष तय कर चुकी है। साहित्यिक, सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आयोजनों से समाज को जागृत करनेवाली देश की यह एक अनोखी संस्था है। इस छोटी सी अवधि में ही परोपकार सेवा के क्षेत्र में एक ब्रांड बन गया है। संस्था ने सबके कल्याण की भावना से शिक्षा, चिकित्सा, गौ-सेवा, अत्र जल क्षेत्र सेवा, कन्या विवाह, सत्संग एवं राष्ट्र सेवा के माध्यम से अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है।

Our Initiatives

जरूरतमंद रोगियों की सहायता और मुंबई में इलाज के लिए आने वालों के लिए ‘परोपकार भवन’ का निर्माण।

Impact Stories

नवंबर २००८ में, परोपकार मुंबई की पहली ऐसी संस्था बनी जिसने सिंगापुर से Star Virgo Cruise पर ‘श्रीमद्‌भागवत कथा’ का भव्य आयोजन किया।

समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमें आपके साथ की आवश्यकता है। आज ही हमारे मिशन से जुड़ें और भागीदार बनें।

Upcoming Events

नवंबर २००८ में, परोपकार मुंबई की पहली ऐसी संस्था बनी जिसने सिंगापुर से Star Virgo Cruise पर ‘श्रीमद्‌भागवत कथा’ का भव्य आयोजन किया।

What you are thinking,
We've Answered.

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

Our Initiatives

जरूरतमंद रोगियों की सहायता और मुंबई में इलाज के लिए आने वालों के लिए ‘परोपकार भवन’ का निर्माण।

दूसरों की मुस्कान का
कारण बनें।

आशा और विश्वास

नई शुरुआत

Join us in the journey to empower
communities and change lives.

500+

Peoples joined already